AutorRTJD Incognita Island : कुदरत का कमाल
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🔹 प्रकृति की स्वर रचना   क्या आप कभी कीट संगीतज्ञों से मिले हैं ? यदि नहीं, तो हम आपको निशाचर कोरस के और करीब ले जाएंगे! 🔹 कीड़े क्यों गात...

कीड़े क्यों गाते हैं? How Insects Are Sing !


🔹प्रकृति की स्वर रचना 


  • क्या आप कभी कीट संगीतज्ञों से मिले हैं ? यदि नहीं, तो हम आपको निशाचर कोरस के और करीब ले जाएंगे!



🔹कीड़े क्यों गाते हैं?



कीट एक दूसरे से संवाद के साथ गाते हैं। ज्यादातर मामलों में, मादाओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए पुरुष गायन करते हैं। वे अपना बहुत सारा समय और ऊर्जा इसमें लगाते हैं। चूंकि बहुत सारे कीड़े अपने साथियों को बुला रहे है ।


🔹समयबद्ध गायन


सिकाडास आम तौर पर दिन के उजाले में और शाम को कॉल करते हैं, रात में शांत हो जाते हैं। जबकि दिन में टिड्डों की आवाज सुनाई देती है। कई कैटीडिड्स रात में फोन करते हैं।


🔹वे कैसे गाते हैं?

1)

सिकाडस के पास एक विशेष अंग होता है जिसमें दो घुमावदार प्लेटें होती हैं जिन्हें "टिंबल्स" कहा जाता है। यह इन प्लेटों को तेज गति से अंदर और बाहर पॉप करता है, जिससे बहुत तेज आवाज पैदा होती है। प्रत्येक सिकाडा प्रजाति का अपना विशिष्ट भनभनाहट होता है।


2)

कैटीडिड अपने अग्रपंखों को आपस में रगड़ कर आवाज निकालते हैं। यह उस ध्वनि से नाम प्राप्त करता है जो यह बनाता है, यह एक तीन-नोट गीत ध्वनि है जैसे "का-टी-डीड।"



3)

झींगुरों के पिछले पैरों पर रीढ़ होती है, जिससे वे आवाज करने के लिए पेट पर एक कठोर प्लेट के खिलाफ रगड़ते हैं।



4)

टिड्डे अपने पिछले पैरों को अपने पंखों पर रगड़ कर आवाज पैदा करते हैं। कुछ प्रजातियाँ अपने पंख फड़फड़ा कर ऐसा करती हैं। वे अपने मुंह से शोर भी कर सकते हैं, जो बहुत ही शान्त चहकती आवाज है।

काजीरंगा नेशनल पार्क  राष्ट्रीय उद्यान  हर बार की तरह इस बार फिर आपके लिए भारत की ऐतिहासिक धरोहर की इस श्रेणी में एक और नेशनल पार्क पेश करते...

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान Kaajiranga National Park


काजीरंगा नेशनल पार्क 

राष्ट्रीय उद्यान 


हर बार की तरह इस बार फिर आपके लिए भारत की ऐतिहासिक धरोहर की इस श्रेणी में एक और नेशनल पार्क पेश करते है इस बार फोकस करते हैं काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर-


काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को युनेस्को ने वर्ष 1985 में विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया था।

भारत में पाई जाने वाली कपि की एकमात्र प्रजाति लॉक गिब्बन भी यहां पाई जाती है। साथ ही भारतीय हाथी, गौर, सांभर, स्लॉथ बियर आदि प्राणी भी देखे जा सकते हैं।


काजीरंगा नेशनल पार्क को वर्ष 1974 में भारत में असम के राष्ट्रीय उद्यान गोलाघाट और नागांव घोषित किया क्षेत्रों में स्थित है। गया था।


काजीरंगा उद्यान एक सींग वाले भारतीय गैंडों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

मुख्य आकर्षक जानवर 


यहां बाघ भी पाए जाते हैं। साथ ही रॉयल बंगाल टाइगर्स और अफ्रीकी तेंदुए जैसी बड़ी बिल्लियों की कई प्रजातियां देखने को मिलती हैं ।

यह असम का सबसे पुराना उद्यान है, जो करीब 430 वर्ग किलोमीटर मैं फैला हुआ है।


  Stone Fish  समुद्र हमेशा से ही रहस्यों और खौफनाक जीवों का वतावरण रहा है । आज तक जितने भी भयानक जीवों के बारे में आज जो कुछ हमे पता है वो क...

पत्थर जैसी दिखने वाली मछ्ली Stone Fish

 

Stone Fish 

समुद्र हमेशा से ही रहस्यों और खौफनाक जीवों का वतावरण रहा है । आज तक जितने भी भयानक जीवों के बारे में आज जो कुछ हमे पता है वो कहीं न कहीं समुद्र से ही जुड़े होते है । चाहे वो दुनिया के सबसे बड़े जीव को लेकर हो या शार्क और ऑक्टोपस के खतरनाक कारनामे हो । मगर हम आज दुनिया के सबसे ज़हरीली मछ्ली के बारे में बात कर रहे है । जी हां , मैं स्टोन फिश ( Stone Fish) की ही बात कर रहा हूं । आपने स्टोन फिश के बारे में सुन तो बहुत होंगा मगर आज हम इसके बारे में कुछ नया जानेंगे । ये समुद्र के सबसे निचले स्तर पर पाए जाने वाली मछली है जो 30 से 40 सेंटी मीटर आकर और 250 से 450 किलो ग्राम तक के वजन के साथ पाई जाती है । इसकी कई सारी प्रजातियां होती है जिसमे कई प्रजातियां आपका मन मोह लेंगी कहने का मतलब दिखने में रंग बिरंगी होती है साथ ही बहुत ही शांत स्वभाव की भी । मगर इसके उलट इसकी कुछ प्रजातियां मानो बिल्कुल पत्थर और खुरदरी त्वचा की भद्दी दिखने वाली होती है । जिस कारण कई बार शिकार इसे पत्थर समझ कर इसके शिकंजे में फस जाते है । ये इतनी जहरीली होती है की कई बार गोताखोर भी इसके शिकार हो चुके है । स्टोन फिश जैसा की इसके नाम से पता चल रहा है ये एक लंबे समय तक एक ही जगह स्थिर रहती है जिस कारण से इसके शरीर पर कई भी उग आती है जिस वजह से अपने शिकार को गुमराह करने में और सक्षम हो जाती है । स्टोन फिश आमतोर पर छोटे छोटे जीव और मछलियां ही कहती है मगर कई बार ये इसके आकर के बड़े जीवों का भी शिकार कर जाती है । भले मानव अंतरिक्ष में जाकर ही रहने लगा है मगर आज भी धरती पर ही समुद्र को पूरी तरह से नहीं समझ सका है । हम जब भी समुद्र की बात करते है तो सबसे पहले हमें बीच और उसपर होने वाली मौज मस्ती या फिर किसी जहाज़ी बेड़े की कहानी ही याद आती है । मगर हम समुद्र के वास्तविक स्वरूप से बेखबर होते है । 



 आपने दुनिया के सबसे बड़े जीव का नाम सुना ही होगा जो  की एक " व्हेल " मछ्ली है । मगर हम आज आपको दुनिया नहीं इस पृथ्वी पर पाए जाने ...

सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे Smallest Mammals in the earth

 आपने दुनिया के सबसे बड़े जीव का नाम सुना ही होगा जो  की एक " व्हेल " मछ्ली है । मगर हम आज आपको दुनिया नहीं इस पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे सुष्म जीव जो की एक मैमलस है उसकी बात करेंगे । इस जीव को नाम है " सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे " यानी White toothed pygmi shrew ।

मैमल :  सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे 


आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह जीव मात्र 1.56 या सीधे शब्दों में कहें तो डेढ़ ग्राम का है और इसकी लम्बाई महज़ 4 सेंटी मीटर हैं । वाकई हमारी धरती अजूबों और अनूठो का गृह है । यह जीव दिखने में बिल्कुल एक चूहे के समान दिखाई देता है ।



 नॉर्वे ( norwegian ) देश उन बेशुमार देशों की गिनती में आता हैं जहा की सौंदर्यता और खूबसूरती दुनिया भर में एक मिसाल कायम करती है । मैं यू ही...

नार्वे देश : Norway desh se jude rochak tathya। Incognita Island।

 नॉर्वे ( norwegian ) देश उन बेशुमार देशों की गिनती में आता हैं जहा की सौंदर्यता और खूबसूरती दुनिया भर में एक मिसाल कायम करती है । मैं यू ही बड़ा चढ़ा कर नहीं बोल रहा हूं , बल्कि जब आप खुद इसके करिश्में के बारे में जानोगे तो यकीनन दंग रह जाएंगे । नार्वे नॉर्थन यूरोपियन देश है जिसकी राजधानी ओस्लो( oslo) है और यहां की करेंसी क्रोन ( Krone) है । नार्वे को दुनियाभर में कई सारे नामो से जाना जाता है जेसे ~" उजालों का देश " , " आधी रात का सूरज " ," शांति की मिसाल "  और भी कई नाम है इस देश के । नॉर्वे के लोग ज्यादातर अंग्रेज़ी भाषा ही बोलते है । नॉर्वे अपनी अद्भुत प्राकृतिक घटना के कारण मशहूर है । होता यू है कि नॉर्वे अपनी भौतिक स्थिती के कारण यहां पर एकांतर मौसम बना रहता है , सदैव सूरज की रोशनी पड़ती रहती है जिस वजह से इस देश के ज्यादातर हिस्सों में रात ही नही पड़ती है । नॉर्वे में 76 दिन तक सूरज नहीं डूबता है हालाकि रात को 12 बजकर 43 मिनट पर 40 मिनट के लिए ही डूबता है या यू कहे मात्र 40 मिनट की रात होती है नॉर्वे में । 


इस प्रकार इस देश में हमेशा दिन जैसा ही माहौल बना रहता है । यहां के लोगो में सोने और उठने की अलग ही दिनचर्या बनी हुई है । इसके अलावा भी नॉर्वे को कई और अनूठे अंदाज के लिए जाना जाता है । यहा के लोग किताबो को बहुत ज्यादा प्राथमिकता देते है और नॉर्वे की सरकार भी किताब लिखने पर उचित प्रोत्साहन की सुविधा प्रदान करती है । इस सुंदर और स्वर्ग जेसे देश में ऐसी भी जगह है जिस का नाम हेल ( hell )  है । इसके अलावा नॉर्वे में मुजरिमों को अभिन्न छूट दी जाती है , यहां के कैदियों को इंटरनेट की सुविधा दी जाती है जो अपने आप में अनोखी बात है साथ ही कैदियों को एक सप्ताहिक अवकाश भी दिया जाता है । यहाँ के कैदी एक आम नागरिक की तरह ही जेल में काम करके एक अच्छा खासा वेतन भी अर्जित कर लेते है । इतना ही नहीं अगर आप नॉर्वे में किसी व्यक्ति की हत्या भी कर देते है तो शायद आपको उम्र कैद की सजा नही होंगी क्योंकि यहां की सबसे बड़ी सजा 21 साल की ही होती है । नॉर्वे को 2013 में वैश्विक शांति सूचांक द्वारा सबसे शांत देश की श्रेणी में 162 देशों की हिस्सेदारी में 11 वा स्थान दिया है । इसी वजह से नॉर्वे ने 2017 में FM RADIO की संचार सुविधा को पूर्ण तरह से प्रतिबंध कर दिया है जिससे वहां के वातावरण में कोई बाधा नहीं आए । नॉर्वे में 17 मई 1814 को संविधान बनकर लागू हो गया था इसलिए 17 मई नॉर्वे में राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है । इस तरह की खूबियों से भरपूर देश में कोन नहीं जाना चाहेगा मगर मैं आपको बता दू अगर आप नॉर्वे में जाकर डेरा डालकर एक लंबे समय तक रहना चाहते है तो ये सुविधा भी बिलकुल फ्री है नॉर्वे अपने पर्यटकों को विशेष छूट प्रदान करती है । 



  टाइफून , भवंडर या चक्रवात और ट्रॉपिकल स्टॉर्म : समुद्रीय सतह (surface) पर तीव्रता (intensity) से तापमान (temperature) की आवर्ती ( frequenc...

🌀 Typhoon kya hai - What is it Hurricane Cyclone and Thunderstorm

 टाइफून , भवंडर या चक्रवात और ट्रॉपिकल स्टॉर्म :


समुद्रीय सतह (surface) पर तीव्रता (intensity) से तापमान (temperature) की आवर्ती ( frequency) में आए परिवर्तन से उत्पन्न आकस्मिक तूफान या आंधी को टाइफून का नाम दिया गया है । इसे क्षेत्र और भाषा के अनुसार अलग - अलग नाम से पहचाना जाता है । ट्रॉपिकल स्टॉर्म , चक्रवात ,भवंडर एक ही परिस्थिति के पहलू है जो समूद्र में असंतुलन के कारण जन्म लेते है ।