AutorRTJD Incognita Island : पहाड़
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 आपने दुनिया के सबसे बड़े जीव का नाम सुना ही होगा जो  की एक " व्हेल " मछ्ली है । मगर हम आज आपको दुनिया नहीं इस पृथ्वी पर पाए जाने ...

सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे Smallest Mammals in the earth

 आपने दुनिया के सबसे बड़े जीव का नाम सुना ही होगा जो  की एक " व्हेल " मछ्ली है । मगर हम आज आपको दुनिया नहीं इस पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे सुष्म जीव जो की एक मैमलस है उसकी बात करेंगे । इस जीव को नाम है " सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे " यानी White toothed pygmi shrew ।

मैमल :  सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे 


आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह जीव मात्र 1.56 या सीधे शब्दों में कहें तो डेढ़ ग्राम का है और इसकी लम्बाई महज़ 4 सेंटी मीटर हैं । वाकई हमारी धरती अजूबों और अनूठो का गृह है । यह जीव दिखने में बिल्कुल एक चूहे के समान दिखाई देता है ।



   बंधा पहाड़ महाराष्ट्र के सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला पर बसे एक पहाड़ का नाम है । बंधा पहाड़ प्राचीन समय का अज्ञात और अंजान पहाड़ है जो नवगाव ...

बंधा पहाड़

 




 बंधा पहाड़ महाराष्ट्र के सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला पर बसे एक पहाड़ का नाम है । बंधा पहाड़ प्राचीन समय का अज्ञात और अंजान पहाड़ है जो नवगाव नामक गांव जहा आदिवासियों का इलाका है उसी के समीप भीषण जंगलों से घिरा हुआ है ।

  चांदन बाबा का पहाड़ का शाब्दिक अर्थ होता है " चांद का पहाड़ " जो सबसे ऊंचे पहाड़ को कहा जाता है ।

चांदन बाबा पहाड़

 

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चांदन बाबा का पहाड़ का शाब्दिक अर्थ होता है " चांद का पहाड़ " जो सबसे ऊंचे पहाड़ को कहा जाता है ।

आपने आज तक  कई पहाड़ों और जंगलों के बारे में सुना या पड़ा होंगा जिसमे से कई पहाड़ों ने आपको हैरान भी किए होंगा । आज में ऐसे ही हैरत से भरपूर...

चंद्र पहाड़ -The mountain of The Moon



आपने आज तक  कई पहाड़ों और जंगलों के बारे में सुना या पड़ा होंगा जिसमे से कई पहाड़ों ने आपको हैरान भी किए होंगा । आज में ऐसे ही हैरत से भरपूर पहाड़ के बारे में बताने वाला हूं जिसके बारे में जानकर आप यकीनन वहा जाने के लिए गदगद हो जावोंगे । जब पढ़ने पर इसका इतना प्रभाव पड़ता है तो आप सोचिए इसको वास्तविक में देखने में कितना रोमांच आता होंगा । मैं जिस पहाड़ की बात कर रहा हूं वो दुनिया का सबसे रहस्यमय पहाड़  " चंद्र पहाड़ " है जिस का नाम सुनते ही कई के रोंगटे खड़े हो जाते है । जी हां , मैं दक्षिण अफ्रीका की गोद में सिमोया हुआ उसी पहाड़ के बारे में बात कर रहा हूं जहा पर आज भी किसी मानविक संसाधनों का पहुंच पाना असम्भव है । मैं उसी पहाड़ के बारे में बता रहा हूं जहा तक पहुंचने के लिए सेकडो लोगो ने अपना बलिदान किया है । चंद्र पहाड़ पर बना एक उपन्यास जिसको बांग्ला भाषा में विभूतिभूषण जी ने अनुवाद किया है उसमे बताया गया है की इस पहाड़ पर सोने की खदानों की खोज में कई गिरोह ने अनगिनत प्रयास किए है। जिनके किस्से को रोमांचक तरीके से इस उपन्यास में पिरोया गया है ।

इस उपन्यास ने कई अनकहे पहलू के  बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दिया है । द माउंटेन ऑफ द मून दक्षिण अफ्रीका के जंगलों के बीचों - बीच बसा हुआ है । साइबेरिया देश के नजदीक ही घने जंगलों के मध्य कही गुमनाम जगह पर इसकी स्थिति से किसी की पहुंच से परे है ये पहाड़ । इस पहाड़ के बारे में सन् 1909 में एक यूरोपियन भौगालिक खोजकर्ता ने पता लगाया और उन्होंने कुछ मानचित्र भी बनाए थे । फिर बादमें  किसी रहस्यमय तरीके से उस भौगालिक विशेषज्ञ की हत्या हो गई और वो मानचित्र भी कही गुम हो गए है । बाद में 19018 में " द माउंटेन ऑफ अफ्रीका " नामक बुक में पहली बार इसका प्रकाशन हुआ । क्योंकि यहां कोई आता जाता नही इसलिए इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है । विशेषज्ञ का मानना है की चंद्र पहाड़ किसी ज्वालामुखी की गोद में बसा हुआ है , ये ज्वालामुखी कई हजारों सालों से निष्क्रिय है । इंग्लिश के अक्षरों का संक्षेप में इसका उच्चारण " MOTH" होता है । चंद्र पहाड़ अनोखे और अमूल्य हीरो और सोने की खदानों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है ।  जिस चक्कर में आज भी कई लोग यहां चले आते है और जंगल में ही भटक जाते है जो उनमें बचकर वापस आ पाते है वो फिर उस भयानक जंगल के बारे में हमे  बताते है । क्योंकि चंद्र पहाड़ तक पहुंचने के लिए दक्षिण अफ्रीका के उस भयानक और विशाल जंगल को पार करना पड़ता है । जहां कई जहरीले और जानलेवा जानवर पाए जाते है उनमें से कई जानवरो से तो हम आज भी अंजान है ।
ये कभी न खत्म होने वाला जंगल है क्योंकि अगर कोई इस जंगल में एक बार घुस जाता है तो वो वापस जिंदा नहीं आ पाता है । यह जंगल इतना खतरनाक है की आपको वहा समय और दिशा का पता नहीं लग पाएगा क्योंकि वहा ऊंचे और घने विशाल वृक्ष होते है जो सूरज की रोशनी को ढक लेते है जिससे आपको दिन में अंधेरा सा दिखने लगता है । इन्हीं जंगल में कही जंगली आदिवासी जो बहुत घातक होती है उनसे भी सामना हो सकता हैं । इनको मानव के हस्तक्षेप से सख्त नफ़रत है वो आम मनुष्य से बिल्कुल अलग है उनकी भाषा , रहन - सहन और व्यवहार हमसे भिन्न होता है । इन सबसे अगर कोई बच भी जाता है तो इस जंगल में भूख और प्यास ही उसकी जान ले लेगी । और सबसे बड़ी बात अगर आपको इस जंगल की दिशाओं का सही ज्ञान नहीं है तो आप भूल- भुलैया का शिकार हो जायेंगे । क्योंकि इस जंगल में एक जैसी दीखने वाली चीजे होती है जेसे - पेड़ , टीले और चट्टाने इत्यादि । इस जंगल को सरवाइव करने के बाद असली अग्नि परीक्षा शुरू होती है । चंद्र पहाड़ को चढ़ने के लिए 10 से 12 दिन का समय लग जाता है उसके लिए भी पर्वत चढ़ाई का परीक्षण करना पड़ता है । क्योंकि पहाड़ की चढ़ाई के दौरान चट्टाने ढहती रहती है । और भी चढ़ाई के दौरान कई परेशानियां आती है जिसका सामना करने के लिए साहस और धैर्य भरपूर चाहिए होता है । इस पूरे सफर के दौरान किसी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है तो वो है "हौसला" अगर इंसान के पास ये नही है तो वो उसी वक्त एक मुर्दे के समान है । इस पहाड़ पर अभी तक कुछ ही लोग पहुंच पाए है और उनमें से कुछ एक ही वापस जिंदा लोटे है । 


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