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काजीरंगा नेशनल पार्क  राष्ट्रीय उद्यान  हर बार की तरह इस बार फिर आपके लिए भारत की ऐतिहासिक धरोहर की इस श्रेणी में एक और नेशनल पार्क पेश करते...

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान Kaajiranga National Park


काजीरंगा नेशनल पार्क 

राष्ट्रीय उद्यान 


हर बार की तरह इस बार फिर आपके लिए भारत की ऐतिहासिक धरोहर की इस श्रेणी में एक और नेशनल पार्क पेश करते है इस बार फोकस करते हैं काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर-


काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को युनेस्को ने वर्ष 1985 में विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया था।

भारत में पाई जाने वाली कपि की एकमात्र प्रजाति लॉक गिब्बन भी यहां पाई जाती है। साथ ही भारतीय हाथी, गौर, सांभर, स्लॉथ बियर आदि प्राणी भी देखे जा सकते हैं।


काजीरंगा नेशनल पार्क को वर्ष 1974 में भारत में असम के राष्ट्रीय उद्यान गोलाघाट और नागांव घोषित किया क्षेत्रों में स्थित है। गया था।


काजीरंगा उद्यान एक सींग वाले भारतीय गैंडों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

मुख्य आकर्षक जानवर 


यहां बाघ भी पाए जाते हैं। साथ ही रॉयल बंगाल टाइगर्स और अफ्रीकी तेंदुए जैसी बड़ी बिल्लियों की कई प्रजातियां देखने को मिलती हैं ।

यह असम का सबसे पुराना उद्यान है, जो करीब 430 वर्ग किलोमीटर मैं फैला हुआ है।


  हम इस कॉलम में हर बार आपके लिए लेकर आते हैं पानी के अंदर पाए जाने वाले अजब अनोखे प्राणीयों के बारे में जानकारियां तो इस बार जानिए स्टिंग्र...

अनोखी स्टिंग्रे मछली Sting Ray Fish के बारे में रोचक बातें

 हम इस कॉलम में हर बार आपके लिए लेकर आते हैं पानी के अंदर पाए जाने वाले अजब अनोखे प्राणीयों के बारे में जानकारियां तो इस बार जानिए स्टिंग्रे मछली के बारे में....

Stingray Fish 


इस मछली की पूंछ में जहर होता है और यह लगभग 8 इंच लंबी होती है। स्टिंग्रे जब डर महसूस करती है तो इनकी पूंछ भाले जैसी सख्त हो जाती है। इस स्थिति में जहर से भरी यह पूंछ किसी के लिए भी घातक हो सकती है । ये मछलियां अंडे नहीं देतीं, बल्कि एक बार में 2 से 6 बच्चों को जन्म देती हैं।

🔺इस मछ्ली से जुड़े रोचक तथ्य : - 

स्टिंग्रे एक समुद्री मछली है, जो शार्क प्रजाति से संबंधित कार्टिलाजिनस (Cartilaginous) मछली है।

स्टिंग्रे समुद्र के तल में रेत के अंदर छिपकर रहती हैं। इनका पतला शरीर छिपने में बहुत सहायक होता है।

पूरी दुनिया में इनकी करीब 200 प्रजातियां मौजूद हैं।





इनके शरीर में कंकाल (skeleton) नहीं होता, एक रीढ़ की हड्डी होती है जो पूंछ तक होती है।

इनका जीवनकाल लगभग 15 से 20 साल का होता है।

◾डिस्क के आकार के समतल शरीर के साथ इनकी पतली पूंछ होती है।

वयस्क स्टिंग्रे मछली का वजन लगभग 350 किलो तक होता है। यह करीब 6.5 फीट तक लंबे हो सकते हैं।

इनका मुह, नाक और गलफड़े बहुत छोटे होते हैं और शरीर के नीचे की तरफ होते हैं।

स्टिंग्रे के समूह को अंग्रेजी में फेवर (Fever) कहा जाता है।

स्टिंग्रे मछली की कुछ प्रजातियों की पूंछ में कांटे होते हैं, जिससे वे शिकार पर ◾हमला करते हैं।

◾ये अपनी पूंछ से डंक मारकर शिकार में जहर डाल देती है, जिससे शिकार को लकवा मार जाता है और वह उसे निगल लेती है।



नासा द्वारा ली गई इमेज  हाल ही में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपनी 'आइजन द सोलर सिस्टम' (Eyes on the Solar System)वेबसाइट को अपडेट...

क्या हैं "आइज ऑन द सोलर सिस्टम ? "

नासा द्वारा ली गई इमेज 


हाल ही में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपनी 'आइजन द सोलर सिस्टम' (Eyes on the Solar System)वेबसाइट को अपडेट किया है। आइए जानते हैं इसके बारे में

नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी यह वेबसाइट अंतरिक्ष और कैलटेक में विजुलाइजेशन में दिलचस्पी रखने वाले टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन एंड लोगों को 'ब्रह्मांड और डेवलपमेंट टीम ने यह सिस्टम उसकी खोज करने वाले ' • विकसित किया है और इसे डेवलप अंतरिक्ष से रिलेटेड चीजों करने में लगभग दो साल से अधिक को एक्सप्लोर करने में का समय लगा है। मदद करता है।


वेबसाइट पर आने वाले यह अपडेट बेहतर कंट्रोल विजिटर्स साल 1950 से 2050 और नेविगेशन के साथ पृथ्वी, तक ग्रहों, उनके चंद्रमाओं, सौर मंडल, क्षुद्रग्रह इत्यादि क्षुद्रग्रह (Asteroid), धूमकेतुओं के बारे में अच्छा और रोचक और अंतरिक्ष यान आदि का पता जानकारियों को जानने का लगा सकते हैं। अवसर प्रदान करता है।


यह अनूठी 3D वेबसाइट सौर मंडल के अतीत, वर्तमान और भविष्य के रीयल-टाइम 3D डेटा विजुअल के द्वारा पेश करती है। यह अद्भुत 3D व्यू में सितारों को हाइलाइट करती है और उनके चारों ओर के एक्सोप्लैनेट का पता लगाने में भी मदद करती है।




 आपने दुनिया के सबसे बड़े जीव का नाम सुना ही होगा जो  की एक " व्हेल " मछ्ली है । मगर हम आज आपको दुनिया नहीं इस पृथ्वी पर पाए जाने ...

सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे Smallest Mammals in the earth

 आपने दुनिया के सबसे बड़े जीव का नाम सुना ही होगा जो  की एक " व्हेल " मछ्ली है । मगर हम आज आपको दुनिया नहीं इस पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे सुष्म जीव जो की एक मैमलस है उसकी बात करेंगे । इस जीव को नाम है " सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे " यानी White toothed pygmi shrew ।

मैमल :  सफेद दांतेदार पिग्मी श्रे 


आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह जीव मात्र 1.56 या सीधे शब्दों में कहें तो डेढ़ ग्राम का है और इसकी लम्बाई महज़ 4 सेंटी मीटर हैं । वाकई हमारी धरती अजूबों और अनूठो का गृह है । यह जीव दिखने में बिल्कुल एक चूहे के समान दिखाई देता है ।



  कोमोडो ड्रैगन कोमोडो ड्रैगन एक प्रकार की छिपकली है जो आमतोर पर इंडोनेशिया के आइलैंड्स में पाई जाती हैं । यह lizard लिजार्ड फैमिली की ही एक...

Largest and big lizard in the world

 

कोमोडो ड्रैगन

कोमोडो ड्रैगन एक प्रकार की छिपकली है जो आमतोर पर इंडोनेशिया के आइलैंड्स में पाई जाती हैं । यह lizard लिजार्ड फैमिली की ही एक प्रजाति है जो घड़ियाल जैसी ही दिखती है । यह धरती पर रेंगकर चलने वाली सबसे बड़ी छिपकली है । यह लगभग 3 मीटर लंबी और 70 किलोग्राम वजन लिए रेंगती है । 

मॉनिटर लिजार्ड प्रजाति की यह छिपकली सांप , पक्षी , मैमल्स और वो सभी छोटे जीव जो जमीनी सतह पर पाए जाते है ये उन सभी को अपना शिकार बनाती है । वैसे तो ये ज्यादा खतरनाक जीवों की श्रेणी में नहीं आती है । मगर जब ये बहुत भूखी होती है तो सामने आने वाली हर चीज से उलझ जाती है और कई भिड़त में ये सामने वाले जीव की हालत पतली कर देती है । कहा जाता हैं की कोमोडो ड्रैगन 900 फिट दूर स्थित चीजों को भी आसानी से देख लेती है और ये अपने शिकार को दूर से ही नजरे गड़ाए रहती है । आमतौर पर छिपकलियां या मॉनिटर फैमिली के जीव आलसी और धीमी गति के होते है मगर कोमोडो दिन भर में लगभग 2 किलो मीटर तक का सफर तय कर सकती है । ये वाकई में बहुत बड़ा कारनामा है क्युकी इसकी तुलना में दूसरे रेप्टाइल्स ज्यादा घूमक्कड़ नहीं होते है । 



 नॉर्वे ( norwegian ) देश उन बेशुमार देशों की गिनती में आता हैं जहा की सौंदर्यता और खूबसूरती दुनिया भर में एक मिसाल कायम करती है । मैं यू ही...

नार्वे देश : Norway desh se jude rochak tathya। Incognita Island।

 नॉर्वे ( norwegian ) देश उन बेशुमार देशों की गिनती में आता हैं जहा की सौंदर्यता और खूबसूरती दुनिया भर में एक मिसाल कायम करती है । मैं यू ही बड़ा चढ़ा कर नहीं बोल रहा हूं , बल्कि जब आप खुद इसके करिश्में के बारे में जानोगे तो यकीनन दंग रह जाएंगे । नार्वे नॉर्थन यूरोपियन देश है जिसकी राजधानी ओस्लो( oslo) है और यहां की करेंसी क्रोन ( Krone) है । नार्वे को दुनियाभर में कई सारे नामो से जाना जाता है जेसे ~" उजालों का देश " , " आधी रात का सूरज " ," शांति की मिसाल "  और भी कई नाम है इस देश के । नॉर्वे के लोग ज्यादातर अंग्रेज़ी भाषा ही बोलते है । नॉर्वे अपनी अद्भुत प्राकृतिक घटना के कारण मशहूर है । होता यू है कि नॉर्वे अपनी भौतिक स्थिती के कारण यहां पर एकांतर मौसम बना रहता है , सदैव सूरज की रोशनी पड़ती रहती है जिस वजह से इस देश के ज्यादातर हिस्सों में रात ही नही पड़ती है । नॉर्वे में 76 दिन तक सूरज नहीं डूबता है हालाकि रात को 12 बजकर 43 मिनट पर 40 मिनट के लिए ही डूबता है या यू कहे मात्र 40 मिनट की रात होती है नॉर्वे में । 


इस प्रकार इस देश में हमेशा दिन जैसा ही माहौल बना रहता है । यहां के लोगो में सोने और उठने की अलग ही दिनचर्या बनी हुई है । इसके अलावा भी नॉर्वे को कई और अनूठे अंदाज के लिए जाना जाता है । यहा के लोग किताबो को बहुत ज्यादा प्राथमिकता देते है और नॉर्वे की सरकार भी किताब लिखने पर उचित प्रोत्साहन की सुविधा प्रदान करती है । इस सुंदर और स्वर्ग जेसे देश में ऐसी भी जगह है जिस का नाम हेल ( hell )  है । इसके अलावा नॉर्वे में मुजरिमों को अभिन्न छूट दी जाती है , यहां के कैदियों को इंटरनेट की सुविधा दी जाती है जो अपने आप में अनोखी बात है साथ ही कैदियों को एक सप्ताहिक अवकाश भी दिया जाता है । यहाँ के कैदी एक आम नागरिक की तरह ही जेल में काम करके एक अच्छा खासा वेतन भी अर्जित कर लेते है । इतना ही नहीं अगर आप नॉर्वे में किसी व्यक्ति की हत्या भी कर देते है तो शायद आपको उम्र कैद की सजा नही होंगी क्योंकि यहां की सबसे बड़ी सजा 21 साल की ही होती है । नॉर्वे को 2013 में वैश्विक शांति सूचांक द्वारा सबसे शांत देश की श्रेणी में 162 देशों की हिस्सेदारी में 11 वा स्थान दिया है । इसी वजह से नॉर्वे ने 2017 में FM RADIO की संचार सुविधा को पूर्ण तरह से प्रतिबंध कर दिया है जिससे वहां के वातावरण में कोई बाधा नहीं आए । नॉर्वे में 17 मई 1814 को संविधान बनकर लागू हो गया था इसलिए 17 मई नॉर्वे में राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है । इस तरह की खूबियों से भरपूर देश में कोन नहीं जाना चाहेगा मगर मैं आपको बता दू अगर आप नॉर्वे में जाकर डेरा डालकर एक लंबे समय तक रहना चाहते है तो ये सुविधा भी बिलकुल फ्री है नॉर्वे अपने पर्यटकों को विशेष छूट प्रदान करती है । 



 समुद्र में पाए जाने वाले प्राणियों में सबसे मुख्य मछलियां ही आती है । और इसलिए भी समुद्र की रानी मछली को कहा जाता है । आज तक हमने समद्र में...

बुद्धिजीव सी-लॉयन - Difference Between Seal And Sea-Lion

 समुद्र में पाए जाने वाले प्राणियों में सबसे मुख्य मछलियां ही आती है । और इसलिए भी समुद्र की रानी मछली को कहा जाता है । आज तक हमने समद्र में सिर्फ तैरने वाले जीवों से तो परिचित है मगर आज हम जमीन पर रेंगने और चलने वाले जीव के बारे में बात करेंगे । हम सब ये तो जानते है की जंगल का राजा शेर को कहा जाता है । मगर हम अब बात करने जा रहे है समुद्र के शेर के बारे में , आप जिस तरह जंगल के खूंखार शेर को जानते है ये इसके एक दम विपरीत प्राणी है । 

सी~लाईन


सील ( Seal ) , सी-लॉयन ( Sea-Lion ) और वालरस एनिमल पिनेपेड्स ( Pinnipeds ) के रूप में पाए जाते है । पिनिपेड का मतलब ऐसे जीवों से होता है जो थल और जल दोनो आवरण में चल फिर सकते है ।  सील और सी-लॉयन ( जलव्याघ्र ) में कुछ बड़े अंतर है जेसे की सी-लॉयन अपने चारो पट्टिका ( फ्लिपर्स ) का इस्तेमाल कर जमीन पर भी चल सकता है जबकि सील अपने पीछे के हिस्से का सहरा लेकर छलांग लगाकर चलता है । सी-लॉयन दिखने में भालू जैसा लगता है जबकि सील चिकनी चमड़ी वाला व्हेल जैसा दिखता है । नर सी-लॉयन का वजन लगभग 363 किलोग्राम तक होता है और उसकी ऊंचाई 9 फीट के आस पास होती है । जबकि मादा सी-लॉयन का वजन 181 किलोग्राम और ऊंचाई यही कही 6 फीट के आस पास होती है । ये इतना भरकम शरीर लेकर भी पानी में आसानी से तैर लेता है । यह 40 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से पानी को चीरता हुआ तैर लेता है । इसके कान तो होते है मगर आकर में बहुत छोटे जिस वजह से उनमें पानी नहीं घुस पाता है ।  इतना ही नहीं सी-लॉयन अपने शिकार के लिए लम्बे - लम्बे गोते भी आसानी से लगा लेता है । ये अधिकतम 900 फीट  की ऊंचाई तक गोता लगा सकता है ।  मगर ये शिकार के लिए समुद्र के अधिक गहराई में नही जाता क्योंकि वहा इनकी जान को शार्क जेसे खूंखार समुद्री जीवो से खतरा होता है । कहा जाता है बुद्धिमान जीवों की सूची में डॉल्फिन का नाम भी लिया जाता है । और हमारे जलव्याघ्र भी डॉल्फिन की तरह समझदार और चतुरता का उधारण माना जाता है । सी-लॉयन के शरीर पर बाल भी मौजूद होते है ये बाल बारीक तो होते है मगर इनकी मोटाई होने के कारण पानी में तैरने में सहयाता मिलती है । इनके चार फ्लिपर्स पानी और जमीन पर दोनो जगह काम करते है और यही विशेषता इस जीव को अन्य जीवो से अलग करती है । सी-लॉयन  का सामान्यतः गहरा भूरा रंग होता है और गोल - मोटल शरीर संरचना होती है । 



पूरे विश्व में सी-लॉयन की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती है जिसमे से स्टेलर प्रजाती आकर में सबसे बड़ी होती है । ये पूरी दुनिया के समुद्रीय तटो पर मिल जाएंगे सिवाय उत्तरी अटलांटिक महासागर को छोड़कर । इनको ज्यादातर झुंड में देखा जासकता है क्योंकि इसको समूह में रहना पसंद है और ये सुरक्षित भी रहता है । सी-लॉयन को स्तनधारी प्राणियों की श्रेणी में रखा गया है । ये अन्य जीवो की तरह जमीन पर बच्चे देते हैं जिनका प्रारंभिक वजन 7 किलोग्राम तक होता है । इनके बच्चे चलने से पहले पानी में तैरना सीख जाता है । ये दिखने में बहुत ही मासूम और शांत स्वभाव का जीव लगता है , मगर जब इसके शिकार करने का वक्त होता है तो ये ऑक्टोपस जेसे खतरनाक समद्रीय जानवर को भी अपने शिकंजे में कर लेता है । इनका साधारण भोजन तो छोटी - छोटी मछलियां होती है मगर कभी कभार ये झुंड में हमला कर बड़े जीवो का भी शिकार कर लेते है । सी-लॉयन पानी में 20 मिनट तक अपनी सांस रोक कर तैर सकता है और खतरा महसूस होने पर यह मरने का ढोंग भी बड़ी चतुरता से कर लेता है । यह शयाना तो है ही साथ में खूंखार भी है इसलिए इसे समद्रु का शेर भी कहा जाता है । 


➡️और पढ़े●●●

  आपने कभी किसी गाँव या शहर के दो नाम सुने है ? सुने है ना , मगर आज हम ऐसे अनोखे शहर के बारे में बात कर रहे है जिसके तीन नाम है । सुनने में ...

Tin Name wala shahar। Ek Shahar ke Tin Name by Incognita Island ।

 


आपने कभी किसी गाँव या शहर के दो नाम सुने है ? सुने है ना , मगर आज हम ऐसे अनोखे शहर के बारे में बात कर रहे है जिसके तीन नाम है । सुनने में बहुत अजीब लग रहा है न जब मैंने भी पहली बार इस शहर के बारे में सुना था तब मेरी भी यही दशा थी । भारत को अजूबों का देश कहा जाता है और मैं इस बात से पूर्ण सहमत हूं । क्योंकि आज हम भारत के झारखंड के एक ऐसे ही शहर की बात कर रहे है जो अपने तीन अलग - अलग नामो से जाना जाता है । आपने जमशेदपुर का नाम तो सुना ही होंगा , हाँ वही जमशेदपुर जहा पर भारत के मार्वल उद्योगपति रतन टाटा जी की स्टील फैक्ट्रीया स्थित है । यहां पर लौह-इस्पात की देश मे पहली फैक्ट्री बनाई गई थी ।  जब आप जमशेदपुर शहर घूमने के लिए जाओंगे तो आपको पता चलेगा कि इस नाम का स्टेशन वहा है ही नही । आप जिस रेल्वे स्टेशन पर उतरोगे उसका नाम ' टाटानगर ' होंगा । पड़ गए न आश्चर्य में ? मगर आप जैसे ही स्टेशन से निकलकर ऑटो पकड़ कर शहर के अंदर जाएंगे तो अपने आपको जमशेदपुर में पाएंगे । 

टाटा नगर रेलवे-स्टेशन

असल मे इस स्टेशन का नाम स्टील फैक्ट्री की प्रसिद्धि में टाटानगर पड़ गया है । उससे पहले जमशेदपुर का नाम साकची हुआ करता था । ये बात है सन 1907 में जब जमशेदजी नोशैरवानजी टाटा जी ने देश मे पहला स्टील प्लांट स्थापित किया था । तब से 150 परिवारों के इस छोटे गांव का नाम साकची से बदलकर ' जमशेदपुर 'रख दिया गया । इस टाटा स्टील के प्लांट के बनने से देश अब आत्मनिर्भर लौह - इस्पात उत्पादक देश बन गया था इसके अलावा भारत अन्य देशों में स्टील का निर्यात भी करने लगा था । इस उपलब्धि से देश की आर्थिक व्यवस्था में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई और देखते -देखते जमशेदपुर वीश्व प्रसिद्ध हो गया । फिर इसे भारत की रीढ़ की हड्डी माना जाने लगा और इसको ' मिनी इण्डिया ' के नाम की भी उपाधी प्राप्त हो गई है ।

टाटा स्टील प्लांट

इसके अलावा इस शहर की  खूबसूरती बिमिसाल है जो पर्यटकों को आकर्षित कर लेती है । यहां पर सभी धर्मों की मान्यता रखी गई है , सभी तरह के मंदिर , गिरजाघर , गुरुद्वारा ,  फादर टेम्पल , मस्जिद आदि उपस्थित है । यहाँ हिन्दू , सिख , इस्लामी , जैनी , क्रिस्चियन सभी बिना भेदभावक किये भाइचारे के साथ रहते हैं । इसी तरह की धर्मो के अद्भुत संगम स्थली शायद ही कही पर मौजूद होंगी । इसके अलावा इस शहर में तीन  बाजार भी लगते है जिनमे सबसे बड़ा बाजार साकची का बाजार होता है जहाँ पर दुनिया भर की बेशकीमती और बहुमुल्य वस्तुए मिलती हैं । बिष्टुपुर का बाजार में साधरण पहनावे और खाने - पीने की चीजें मिलती है जिनका मूल्य दूसरे बाजार की तुलना में थोड़ा ऊचा  होता है क्योंकि यहाँ रईसों का आव - जाव बना रहता है । इतना सब देखने के बाद जमशेदपुर की फेमस फालूदा कुल्फी के स्वाद से इस शहर की मिठास और  भी बढ़ जाती है । 

मशहूर बाजार

जूलोजिकल पार्क , डालमा वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी , जुबली पार्क , जयंती सरोवर , टाटा स्टील प्लांट , सूर्य मंदिर इस शहर के मुख्य आकर्षण बिंदु है जिनकी मनमोहकता देख नजरे नही हटती है । वाकई में यह शहर अद्भुत है जिस कारण लोग इसके तारीफों के पुल बांधते नही थकते है । इसके तीन नाम होना भी यही दर्शाता है कि इस शहर को जीतने नाम दे उतने काम है । 

शहर के मुख्य आकर्षण स्थल -

जुबली पार्क
जमशेदपुर का मशहूर जुबली पार्क अपने गुम्बज और इसकी खूबसूरत भरे दृश्यों के कारण काफी प्रचलित है । इसका निर्माण टाटा स्टील द्वारा ही किया गया है । सन 1937 में श्री एस . लेक्स्टर की मौजूदगी में इसका खूबसूरत डिज़ाइन तैयार किया गया था । यह पूरा पार्क 500 एकड़ के क्षेत्रफ़ल में फैला हुआ है और हर वर्ष 3 मार्च को यहाँ  भव्य उत्सत्व का आयोजन किया जाता है जिसको देखने के लिए भारी मात्रा में विदेश से भी पर्यटक आते है । 

सूर्य मंदिर
सूर्य मंदिर का स्वामी विधायक सरयू राय है , इस मंदिर के पृष्ठ में 5 घोड़ो का रथ है जो इस मंदिर की सौन्दर्यता बढ़ाता है । यह मंदिर गोलचक्कर बस स्टैंड से 3 से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहाँ पहँचने के लिए लगभग 10 से 15 मिनट का समय लगता है । 

जे. आर. डी. स्पोर्ट स्टेडियम
जे. आर. डी. यानी जहाँगीर रतन दादा जी ने इस स्पोर्ट स्टेडियम का निर्माण करवाया है । इस स्टेडियम का उद्घाटन 1991 इसके स्वामी टाटा जी के मौजूदगी में किया गया था उस समय इसको बनाने की लागत  40 करोड़ रूपया थी । 

जयंती सरोवर
इस सरोवर को बेहद की खूबसूरत ढंग से सजाया गया है और इस पर अय्याशी की सारी सुविधाएं उपलब्ध है । जयंती सरोवर जमशेदपुर के नजदीक ही उपस्थित है जहाँ खासकर बोटिंग की जाती है । इसके अलावा इस तालाब पर आइलैंड भी बनाया गया जिस पर हॉलिडे मनाने लोग आते रहते है । यह सरोवर लगभग 40 एकड़ के बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ है ।

डिमना लेक
जमशेदपुर से 13 किलो मीटर की दूरी तय करने के पश्चात डिमना झील जिसे स्वर्ग कहना गलत नही होंगा मौजूद है । यह वन्य जीव अभ्यारण के नजदीक में ही उपस्थित । जिस पर नवंबर से फरवरी के बीच घूमने के उत्तम समय माना जाता हैं । 
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● वीश्व विख्यात टाइटैनिक  19 वी शताब्दी में टाइटैनिक पूरे वीश्व का सबसे विशाल और प्रसिद्ध जल जहाज माना जाता था । उस समय इसकी इस वीश्व प्रसिद...

द अनसिंकबल टाइटैनिक : Machination Of Titanic

वीश्व विख्यात टाइटैनिक 


19वी शताब्दी में टाइटैनिक पूरे वीश्व का सबसे विशाल और प्रसिद्ध जल जहाज माना जाता था । उस समय इसकी इस वीश्व प्रसिद्धि इसकी अद्धभुत विशेषताओं से थी । सर्वप्रथम  इस जहाज को  ' द अनसिंकबल ' ( जो कभी डूब नहीं सकता ) की संज्ञा दी गई थी । इस जहाज पर कुल 3549 यात्री एक साथ यात्रा कर सकते थे और 64 लाइफ सपोर्ट बॉट रखने की व्यवस्था थी जो उस समय मे अपने आप मे एक बड़ी उपलब्धि थी । इस जहाज का आधिकारिक नाम - रॉयल मेल स्टीमर ( Royal Mail Steamer ) था । जिसका मतलब होता था भाप पर चलने वाले पात्र और उस समय इस नाम के 200 जहाजो का यही नाम दिया गया था जो मेल का सवंहन करते थे । रॉयल मेल स्टीमर RMS जिसका संशिप्त नाम है उस समय पत्र वाहन का कार्य करते थे । और टाइटैनिक भी उसी उदेश्य से बनाया गया उस समय का सबसे विशाल जहाज था टाइटैनिक का अर्थ भी ' Giant  या विशाल ' होता है । टाइटैनिक पर कुल 3500 पत्र , लिफ़ाफ़े और कागजात भेजे जाते थे । अगर आपने पिक्चर में टाइटैनिक की छवी देखी होंगी तो आपने गौर किया होंगा इसके ऊपर चार चिमनिया होती है । कहा जाता है इनमे से केवल तीन ही चिमनिया काम करती थी चौथी चिमनी जहाज की शोभा बढ़ाने के लिए लगाई गई थी ।

उस समय टाइटैनिक को बनाने की कुल लागत 7 करोड़ 50 लाख डॉलर थी जो आज की तारीख में 20 करोड़ डॉलर के बराबर आकि जाती है । इस विशाल जहाज के मुख्य लंगर को ऊपर उठाने के लिए लगभग 20 घोड़ो की आवश्यकता पड़ती थी उस वक्त जिसका वजन 16 टन अर्थात 16 हजार किलोग्राम होता है 


● टाइटैनिक से जुड़ी जानकारियां -



★ निर्माता -       हरलैंड और वोल्फ 

★ कप्तान -       कैप. एडवर्ड जे स्मिथ 

★ मालिक -       जे . ब्रूस स्मेय 

★ प्रमोचन -       31 मई 1911 , 31 मार्च 1912 ( सम्पूर्ण ) 

★ लंबाई -         882 फ़ीट 

★ उचाई -         53.3 मीटर 

★ स्थान -          इंग्लैण्ड 



 ● कैसे डूबा टाइटैनिक जहाज 


सन 1912 को 10 अप्रैल की सुबह को टाइटैनिक जहाज 2,223 यात्रियों को लेकर आयरलैंड के बेलफ़ास्ट से रवाना हुआ था ।  RMS के लांच को देखने के लिए फेल्फास्ट की जनता में होड़ मच गई थी , लगभग एक लाख लोग उपस्थित थे उस दौरान । टाइटैनिक न्यूयॉर्क शहर की यात्रा में अपने 4 दिन का सफर तय करने के बाद 14 अप्रैल को रात के 2 बजकर 20 मिनट पर एक हिमखण्ड ( Iceberg ) से टकराकर समुद्र में जलसमाधि ले ली थी । इस घटना का प्रकाशन एक अंग्रेजी अखबार ' द लंदन मेल ( The London Mail ) ' में हुआ था जिसका शीर्षक  ' Titanic Sunk , No Lives Lost ' था । उस वक्त ये त्रासदी उस समय तक कि सबसे विचित्र और बड़ी समुद्रीय घटना थी । इस खबर ने लोगो मे अशांति और खल बलि मचा दी थी । पूरा वीश्व इस कभी न डूबने वाले जहाज का इस तरह डूब जाना हजम नही हो रहा था । हालांकि कुल 706 यात्रियों को सकुशल बचा लिया गया था मगर लोगो ने सवाल उठाने शुरू कर दिए थे । जहाज के डूब जाने का मुख्य कारण तो टाइटैनिक की तेज रफ़्तार बताई गई मगर इसके अलावा भी कई पहलू थे जिनको लोगो से छुपाकर रखे गए । जहाज के डूबने के वक्त समुद्र के पानी का तापमान -4℃ था जो एक बर्फ जमने के तापमान से दो गुना अधिक था । 


फिर 18 नवंबर 1997 को जेम्स कैमरॉन  निर्देशन में बनी  फ़िल्म " टाइटैनिक " सिनेमाघरों में आई । हैरानी की बात थी इस मूवी को प्रोड्यूस भी जेम्स कैमरॉन ने किया और 200 मिलियन डॉलर की बड़े बजट में बनाई गई थी । और फ़िल्म ने सिनेमाघरो में गोल्डन जुबली खेली भी और उस वक्त फ़िल्म इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़ कर 2.2 अरब डॉलर की कमाई की थी । इस मूवी ने लोगो को काफी प्रभावित किया और इसके डूबने के कारण को स्पष्ट किया । जेम्स कैमरॉन ने फ़िल्म में उपयोग होने वाले अभिनेत्री ' कैट विंस्लेट ' की स्केटचेस खुद बनाई थी । 


षड्यंत्र या संयोग ?  


तमाम पहलुओं और अवलोकन के खोजबीन करने के बाद इस पूरी घटना को एक आक्समिक दुर्घटना का नाम दे दिया गया । मगर इस तथ्य से कुछ लोगो ने आपत्ति जताई और इस पूरी घटना को एक योजना के तहत रची साजिश बताया मगर कुछ संस्थाओ और इंग्लैंड की सरकार ने इन बातों को बेबुनियाद कह कर अपने पैरों के तले दबा दिया । त्रासदी के 70 साल से अधिक के समय के बाद एक रोबोट सबमरीन की सहायता से इसके अवशेषों को ढूंढ लिया गया । RMS के अवशेषों को समुद्र की 8.5 मिल की गहराई में ढूंढ़ा गया था ।  टाइटैनिक जिस हिमखण्ड से टकराया था वो धरातल से 100 फ़ीट ऊँचा और 200 से 300 फ़ीट गहरा था और हैरानी की बात ये है कि इस हिमखण्ड का जहाज के आगे खड़े होने की भनक कैप्टेन को महज 37 सेकण्ड्स पहले ही हुई थी । और टाइटैनिक पर कुल 64 लाइफ सपोर्ट बॉट रखी जा सकती थी तो दुर्घटना के समय केवल 19 ही बॉट उपलब्ध थे । जिस वक्त जहाज डूब रहा था उस समय तापमान -4℃ हो गया था ऐसी स्थिति में किसी भी साधारण मनुष्य का 20 मिनट से अधिक जीवित रहना असंभव है । जेम्स कैमरॉन द्वारा बनाई गई फ़िल्म की कमाई से टाइटैनिक जैसे 11 जहाज बनाये जा सकते थे अब आप समझ सकते है मेरा इशारा क्या है । 


सबसे बड़ा इत्तेफाक और सयोंग तो तब होता है जब ये पता चलता है कि टाइटैनिक के डूबने के ठीक 14 वर्ष पहले एक उपन्यास प्रकशित हुआ था जिसका शीर्षक था " द रैक ऑफ टाइटन ओर फ़्यूटीलिटी " जिसके लेखक थे ' मॉर्गन रॉबर्टसन '। जो उस उपन्यास में घटित होता है वैसा ही टाइटैनिक के साथ भी हुआ काफी समानताये थी दोनो में । ऐसा लगता है जैसे उपन्यास की स्क्रिप्ट के आधार पर यह सारा षड्यंत्र रचा जा रहा था । उपन्यास की कथा में भी टाइटन नामक जहाज की टक्कर एक हिमखण्ड से होती है ताजुब की बात तो ये की टाइटैनिक जिस उत्तरी अटलांटिक समुद्र से न्यूफॉउंडलैंड से ठीक 400 नॉटिकल मिल दूर हिमखण्ड से टकराया था यह कथा वाला ही हिमखण्ड था , जिसकी पुष्टि बादमे कर दी गई है । RMS की गति 22.5 नॉटिकल मिल थी वही टाइटन की 25 नॉटिकल मिल थी । टाइटैनिक में 2,223 यात्री सफर कर रहे थे और टाइटन में 2200 यात्री  और ये दोनों जहाज ब्रिटैन के ही थे । दोनो में जहाज डूबने के समय आधी रात का था और लाइफ सपोर्ट बॉट का अभाव था । टाइटन पर 25 लाइफ सुपोर्ट बॉट मौजूद थे तो टाइटैनिक पर 19 बॉट थे । इतनी सारी समानतायें सयोंग से तो नही हो रही थी कुछ न कुछ तो रहस्य था । टाइटैनिक , टाइटन और इसके सदस्यो के बीच कोई कनेक्शन था जिसका पता सबको था मगर कोई बयान ना कर सका । 


इस बात को जिसने भी लोगो तक पहचानी चाही वो किसी न किसी दबाव में पीछे हट गया । लोगो को अब भी यह एक घटना ही लगती है मगर आज भी कई खोजकर्ताओं में मतभेद है टाइटैनिक को लेकर । कुछ बचे यात्रियों का कहना था कि टाइटैनिक पर जहाज डूबने के 3 दिन पहले ही आग लगी हुई थी जिसकी खबर कैप्टेन और कुछ सदस्यों को पहले से थी । इस रहस्यमय जहाज के अवशेष को आज भी समुद्र में से नही निकाला गया है , इसके पीछे का काला सच आज तक किसी को पता नही चल पाया । 

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