AutorRTJD Incognita Island : अंतरिक्ष
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नासा द्वारा ली गई इमेज  हाल ही में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपनी 'आइजन द सोलर सिस्टम' (Eyes on the Solar System)वेबसाइट को अपडेट...

क्या हैं "आइज ऑन द सोलर सिस्टम ? "

नासा द्वारा ली गई इमेज 


हाल ही में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपनी 'आइजन द सोलर सिस्टम' (Eyes on the Solar System)वेबसाइट को अपडेट किया है। आइए जानते हैं इसके बारे में

नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी यह वेबसाइट अंतरिक्ष और कैलटेक में विजुलाइजेशन में दिलचस्पी रखने वाले टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन एंड लोगों को 'ब्रह्मांड और डेवलपमेंट टीम ने यह सिस्टम उसकी खोज करने वाले ' • विकसित किया है और इसे डेवलप अंतरिक्ष से रिलेटेड चीजों करने में लगभग दो साल से अधिक को एक्सप्लोर करने में का समय लगा है। मदद करता है।


वेबसाइट पर आने वाले यह अपडेट बेहतर कंट्रोल विजिटर्स साल 1950 से 2050 और नेविगेशन के साथ पृथ्वी, तक ग्रहों, उनके चंद्रमाओं, सौर मंडल, क्षुद्रग्रह इत्यादि क्षुद्रग्रह (Asteroid), धूमकेतुओं के बारे में अच्छा और रोचक और अंतरिक्ष यान आदि का पता जानकारियों को जानने का लगा सकते हैं। अवसर प्रदान करता है।


यह अनूठी 3D वेबसाइट सौर मंडल के अतीत, वर्तमान और भविष्य के रीयल-टाइम 3D डेटा विजुअल के द्वारा पेश करती है। यह अद्भुत 3D व्यू में सितारों को हाइलाइट करती है और उनके चारों ओर के एक्सोप्लैनेट का पता लगाने में भी मदद करती है।




 आए दिन वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों ने कुछ न कुछ उपलब्धियां हासिल किया करते है । मानवता का विकास तीव्रता से हो रहा है और यही मसला है ज...

नासा ने खोजा नया ग्रह new earth in space

 आए दिन वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों ने कुछ न कुछ उपलब्धियां हासिल किया करते है । मानवता का विकास तीव्रता से हो रहा है और यही मसला है जो एक दिन भविष्य में हमे नए घर कहने का मतलब नए ग्रह की जरूरत पड़ने वाली है । नासा जेसी उत्कृष्ट अंतरिक्ष संस्था निरंतर इसी समस्या का हल ढूंढने में लगी हुई है ।


यहां तक उन्होंने 2031 तक साधारण मनुष्य की यात्रा को भी सफलतापूर्वक कराने का दावा किया है । और ये बात कुछ हद तक सही भी लगती है क्योंकि इससे पहले भी नासा ने कई असंभव मिशन को अंजाम दिया है । और इसी कड़ी में अब नासा ने बहुत ही बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है नासा के वैज्ञानिको ने 13,000 प्रकाश वर्ष दूर एक नए जमे हुए ग्रह का पता लगा लिया है जिसका द्रव्यमान पृथ्वी के समीम ही है । इस प्लेनेट की खोज से हमारे ग्रह के इतर दूसरी तरह की ग्रहीय व्यवस्थाओं को समझने में मदद मिलेंगी । शोधकर्ताओं की मानी तो ये ग्रह फिलहाल में बहुत ठंडा है जिस कारण इस वक्त वहा मनुष्य के रहने लायक वातावरण नही है । मगर भविष्य में वहा एक अनुकूल वातावरण की घनिष्ट आसार देखे जा सकेंगे । इसके अत्यधिक ठंडे होने के पीछे इसके तारे का बेहद निस्तेज होना है । संयुक्त राज्य अमेरिका
 में नासा की जेट प्रोपल्सन लैबोरेटरी के योसी श्वाटॉर्चवाल्ड ने कहा है " माइक्रोलेंसिंग के जरिए खोजा गया ' आइसबॉल ' सबसे कम द्रव्यमान वाला ग्रह है  । " आपको बता दे कि माइक्रोलेंसिंग एक ऐसी तकनीक होती है जो पृष्ठभूमि के तारो का प्रयोग फ्लैशलाइट के तौर पर करके सुदारवर्ती चीजों की खोज की सुविधा प्रदान करती हैं ।      

इन्ही सभी संकेतो से एक बात तो साफ नजर आती है की नासा " आईसबॉल " पर जीवन बसाने की फिराक में है । अभी तक नासा ने इस खोज से संबंधित कई पहलुओं को गुप्त ही रखा है । और इसके बारे में कोई आधिकारिक सूचना भी नही दी है वो इस मिशन को लोगो से छुपाकर काम कर रहे है । 


 कुछ दिन पहले ही ऐसी है खबर आई थी की नासा ने पृथ्वी के चारो ओर मानव निर्मित अवरोधक का पता लगाया है । नासा के अनुसंधान के द्वारा पृथ्वी के बाहरी आवरण में मानवनिर्मित अवरोधक का पता चला है जो उच्च ऊर्जा वाले अंतरिक्ष विकिरण के अनुसंधान के द्वारा पृथ्वी के बाहरी आवरण में मानवनिर्मित को ग्रह पर आने से बाधित करता है । मनुष्य लंबे अरसे से पृथ्वी के भू-परिदृश्य का आकर निश्चित करने का प्रयत्न करता आ रहा है । और अब तमाम प्रयासों के बाद वेज्ञानिको ने ये पाया की हम अपने निकटवर्ती अंतरिक्ष पर्यावरण का भी मापन करने में सक्षम है । अनुसंधान के द्वारा एक विशेष प्रकार की संचार व्यवस्था - बहुत कम आवर्ती वाली रेडियो संचार - व्यवस्था को अंतरिक्ष के कणों को प्रभावित करते हुए देखा गया । इस वजह से कणों के स्थान में परिवर्तन की क्रिया प्रभावित होती है । कई दफा ये परस्पर प्रक्रिया अंतरिक्ष की उच्च ऊर्जा वाले विकिरण के विरुद्ध पृथ्वी की चारो ओर एक अवरोधक बना लेती है । इस अनुसंधान का का प्रकाशन ' स्पेस साइंस रिव्यू '( space science review ) ' जर्नल में हुआ था ।




मनुष्य ने जितना विकास धरती पर किया है भविष्य में उतना ही विकास अंतरिक्ष में देखने को मिलेगा । और ये कड़वा सच भी है की मनुष्य ने जितनी गंदगी धरती पर फैलाई है उतना ही प्रदूषण वो अंतरिक्ष में भी करेगा । माना की नए खोजो और अविष्कारों से उन्नति होती है मगर ऐसी उन्नति किस काम की जिसके बदले हमे अपने अस्तित्व को क्षति पहुचाते हैं । आज नासा विश्व की उत्कृष्ट अंतरिक्ष संस्था मानी जाती है । मगर उनकी सफलताओं के पीछे उन्होंने भी कई जनहानि को क्षति पहचाई और कुदरत का उत्खनन किया है । नासा उन्ही खबरों को सार्वजनिक करती है जो उनके काम के बारे में होती है उनको नही जो उनकी खामियां पता चले । क्या मेरे इस विचार से आप भी सहमत है ? नहीं तो क्यों ? जो भी आपको सही लगे हमे अपने विचार साझा करे । 

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  जब भी अंतरिक्ष की बात की जाती है तो सर्वप्रथम हमारे ध्येय में सौरमंडल के 8 गृह का विचार आता ही है । आए भी क्यों नही हमने इनके बारे में बचप...

बर्फीले गैस दानव Arun and Varun Planets

 


जब भी अंतरिक्ष की बात की जाती है तो सर्वप्रथम हमारे ध्येय में सौरमंडल के 8 गृह का विचार आता ही है । आए भी क्यों नही हमने इनके बारे में बचपन से लेकर आज तक कुछ न कुछ जानते रहे है । मगर इनके बारे में जीतनी जानकारी मिले हमारे अंदर उतनी ही और उत्सुकता बड़ जाती है । हमने अभी तक सौरमंडल के गृह के बारे में जितनी जानकारी हासिल की है वो पूर्ण जानकारी नहीं है । इनमे से कुछ गृह ऐसे भी है जहा पर वैज्ञानिकों का पहुंचना भी असंभव है । अब आप समझ ही गए होंगे मैं किन गृहों की बात कर रहा हूं । इनको सौरमंडल के '  जुड़वा गृह 'और  ' बर्फीले गैस दानव ' आदि नामो से जाना जाता है । जी हां , आज हम बात करेंगे अरुण और वरुण गृहों के बारे में । यू तो इन गृहों के बारे में हमने काफी कुछ सुना हुआ है मगर इनकी यह जानकारी पर्याप्त नहीं है । समय - समय पर इनके रहस्यों से पर्दा उठता जाता है और हमे नई - नई बातो का खुलासा होता जाता हैं । 


अरुण ~ URANUS


हमारे सौरमंडल में सूर्य के इस आठ अनूठो के समूह में यह  सातवें नंबर का सदस्य है जिसे अंग्रेजी में यूरेनस कहते है । बाकी गृहों की तुलना में अरुण का तापमान बहुत ही कम है , सूर्य से दूर स्थिति के कारण ही इसका वातावरण इतना ठंडा है । अरुण का न्यूनतम तापमान  -49 Kelvin  केल्विन आका गया है जिसका °c में -244° सेंटीग्रेड होता है । इतने कम तापमान में किसी भी जीवाणु या विषाणु का सक्रिय रहना मुश्किल हो जाता है । पृथ्वी की तुलना में यह बहुत कम घना है जिस कारण से इसका घनत्व बहुत कम है क्योंकि अरुण पर गैसीय कणों की अधिकता पाई जाती है । अरुण गृह की खोज 13 मार्च 1781 में में एक खगोलशास्त्री विलियम हरशेल ने की थी । सौरमंडल में हमारी पृथ्वी से दूर होने के बावजूद इसे नंगी आंखो द्वारा भी देखा जा सकता है । हालाकि बिना दूरबीन से देखने पर यह एक तारे के समीप टिमटिमाता दिखाई देता है ।  यही कारण से प्राचीन समय में भी विद्वानों ने इसे टिमटिमाता बड़ा तारा ही समझते थे और इसको गृहों की सूची में शामिल नहीं करे थे ।  

अरुण से सम्बंधित जानकारी 

★ खोजकर्ता -   विलियम हरसोनेल [3 मार्च 1781]

★ उपनाम    -    युरानीयन

★ उपग्रह   -       27 

★ द्रव्यमान  -      8.681×10 ^ 25 किलोग्राम

★ परिक्रमण-      30,799 दिन / एक परिक्रमण सूर्य का 


सौरमंडल के चारो गृहों को गैसीय दानवों का दर्जा दिया गया है जिसमे से अरुण और वरुण दो मुख्य गृह माने जाते है । ये मिट्टी और पत्थर के न बने होकर गैसीय कणों के बने होते है और ये आकर में विशाल होने के कारण भद्दे दिखाई देते है जिस वजह से इनको दानव गृह कहा जाने लगा । इनकी वास्तविक सरंचना तो सीमित होती है मगर गैसीय आवरण या वलय काम ज्यादा होता रहता है । शनि और बृहस्पति की तुलना में अरुण और वरुण गृहों पर बर्फ की मात्रा काफी अधिक है साथ ही अमोनिया और मेथेन गैस की बर्फ भी मौजूद है । 


वरुण ~ NEPTUNE 


वरुण गृह जिसे अंग्रेजी में NEPTUNE PLANET भी कहा जाता है । सौरमंडल के आठ गृहों की श्रृंखला में सबसे आखरी गृह है वरुण , इसे सौरमंडल का सबसे ठंडा गृह भी कहा जाता है । एक ओसत तापमान भी इस गृह पर -214 °C होता है इसका तापमान स्थिर नहीं रहता है । 

वरुण ग्रह से सम्बंधित जानकारी 

★ खोजकर्ता - अर्बेन ले. वैरियर [23 सितम्बर 18]

★ उपनाम - नेप्टियन

★उपग्रह - 11

★ द्रव्यमान - 1.024× 10 वर्ग 26 किलोग्राम

★ परिक्रमण-   60,190 दिन और 3 घंटे 

पृथ्वी से कई प्रकाश वर्ष दूर स्थित होने के कारण इसे नंगी आंखो द्वारा देख पाना संभव नहीं है । इसकी सरंचना अरुण गृह से मिलती-जुलती है इसलिए दोनो में काफी समानताएं भी है । वरुण गृह सभी गृहों की तुलना में बहुत हल्का और कम घना है क्योंकि यह पूरी तरह गैसो से बना हुआ है और इसका यह आवरण हीलियम हाइड्रोजन और मैथन से ही निर्मित है । और मैथन गैस की अधिकता के चलते NEPTUNE PLANET गहरा नीले रंग का दिखाई देता है । इसका रंग समुद्र जैसा होने के कारण इसका नामकरण भी समुद्र के रोमन देवता के नाम पर हुआ है । सौरमंडल के आखरी क्षोर पर होने के कारण सूर्य का पैसिव फोर्स कम होता है इस पर इस वजह से यह बहुत तेज गति से घूमता है । इसकी तेज गति से घूमने के कारण वरुण गृह पर बहुत तेज हवाएं और ठंडे हवा के झोके चलते रहते है । वरुण गृह पर एक घना धब्बा है काले रंग जो हमारी पृथ्वी उतना बड़ा है जिसे  ' द ग्रेट डार्क स्पॉट ' ( The great dark spot ) नाम दिया गया है । जो अरुण गृह को और भी अन्य गृह से अलग  बना देता है । नेपच्यून गृह पर भी शनि गृह की तरह वलय ( Rings ) स्थित है मगर ये वलय इतने हल्के और बारीक है की इनको देख पाना मुश्किल होता है ।  ये वलय मुख्य रूप से  बर्फ के कणों  ( ice particle ) और कार्बन पदार्थ  ( carbon substances ) से निर्मित है । 



  आसमान में हम जब भी नजर उठाके देखते है तो एक ही एहसास होता है आखिर कितना बड़ा है ये ब्रह्माण्ड ?  और क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में हम अकेले म...

Bharat ke jaane pahchane Taaraamandal

 आसमान में हम जब भी नजर उठाके देखते है तो एक ही एहसास होता है आखिर कितना बड़ा है ये ब्रह्माण्ड ?  और क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में हम अकेले मात्र हैं ? । इसी तरह के सोच से परहेज खयाल आते हैं जब भी हम आसमान का रुख करते है तो हमें सिवाय उत्सुकता और प्रश्नों के आलावा कुछ नही हासिल होता है । ऐसा इसलिए क्योंकि हम इसकी खूबसूरती पर कम और इसके वजूद पर ज्यादा ध्यान देते है । आज भी वैज्ञानिकों की कई संस्था इन विषयों पर निरीक्षण कर रही है । आसमान शब्द बोलने में अति सहज और साधारण लगता है मगर इसका अर्थ और परिभाषा उतनी ही जटिल और संरचनात्मक है । आसमान की वास्तविक भव्यता तो रात के अंधेरी में पता चलती है जब सूरज की छवि धरती के उस पार होती है । देखा जाय तो रात और दिन का होना हमारे जीवन की एक साधारण दिनचर्या में आते है मगर इसके पीछे छुपा रहस्य जानकर हैरानी ही होती है । वास्तव में रात पूरी धरती पर न होकर पृथ्वी के आधे भाग पर होती है दूसरे भाग पर दिन होता है ये परिक्रम बदलता रहता है जिसे शाश्वत समय रेखा कहते है । परन्त धरती पर कुछ ऐसी भी जगहें है जहा ये दोनों सिद्धांत लागू नहीं होते है जेसे नार्वे , जापान और दक्षिणी गोलार्ध । क्या आप जानते है हम तारो को दिन में ही क्यों देख पाते है ? इसका भी एक कारण है , यूं तो हर चीज के पीछे एक कारण जरूर होता है । दिन में सूरज की किरणे हमारी आंखों की रेटीना को परिवर्तित कर देती है जिस कारण हम तारो की मौजदूगी मालूम नही पड़ती है । दूसरे शब्दों में कहें तो हमे तारे तभी नजर आते है जब उनके पीछे सूरज का प्रकाश पड़ता है । क्या आपको पता है हम जिस जगह से जिन तारो को देख पाते है क्या उन्ही तारो को हम दूसरी जगह से भी देख पाएंगे ? इसका जवाब इतना साधारण भी नही है ये हमारे सर्फेस और समय पर निर्भर करता है  । इसलिए धरातल और मौसम का भी इसके उपर प्रभाव पड़ता है । आइए भरता के कुछ तारामंडल के बारे में जान लेते है की ये कैसे दिखाई देते है । तारामंडल तारो का एक समूह होता है जो एक आकृति का निर्माण करता है । हा कई तारामंडल में गृह और धुलकन के एस्टीरियड भी शामिल होते है ।  तारामंडल आसमान का अलंकार है या यू कहे तारामंडल ही आसमान है । जब भी रात की खूबसूरती की बाते की जाती है तो पहले जिक्र आसमान का होता है इससे पता चलता है की हमारे जीवन में आसमान की अहमियत कितनी ज्यादा है  भारत के कुछ जाने पहचानें तारामंडल -         

  1. वृहत सप्तर्षि 
      सप्तपुरुष या उर्सा मेजर कहलाने वाला ये तारामंडल सात तारो का        एक समूह है जो प्रश्न वाचक चिन्ह के जैसा दिखाई देता है इसे चारपाई    और हासिया भी कह जाता है । ये प्रमुख तारामंडल की सूची में आता      है ।
  1.  हल का आकार  इसमें भी सात तारो का गुच्छा है और पहले वाले तारामंडल से काफी      ज्यादा मिलता जुलता भी है इसको हल के आकार का दिखाई देने के      कारण इसको इसी नाम से जाना जाता है । ये उत्तर दक्षिणी भाग में        देखा जा सकता है बरसात मौसम में ।
    1. 3." V " अक्षर 
       अंग्रजी  वर्णमाला के अक्षर " V " जैसी आकृति में होता है इस कारण   इसकी खोज हुई । ये मात्र तीन ही तारो का तारामण्डल होने कारण सबसे छोटा तारामण्डल भी है ।    

          4. कालपुरूष या मृग 
                  यह भारत का मुख्य कालपुरुष है जिसे मृग भी कहा जाता                है । ये दिखने में सबसे सुंदर और नजदीक होने की वजह                  से चमकदार भी है । 



    कहा जाता है धरती पर जीतनी भी चीजे उपस्थित है उनका तारामंडल आसमान में मौजूद है मगर हम उनको ढूंढ नही पाते है । इसलिए तारामण्डल के नाम उनके समान दिखने वाली वस्तुओं के आधार पर रखा गया हैं , कई देशों में इनका नाम बदल जाता है । तारामण्डल अस्थिर है वे समय के साथ अपनी जगह बदलते जाते है इससे हम ये अंदाजा लग जाता है की तारे स्थिर नहीं होते है । मगर ये अत्यधिक दूर होने के कारण हमें इनकी चलन का अनुभव सही से नही हो पाता है । पृथ्वी के परिक्रमण के कारण ये अपनी दिशा बदल लेते है जिसकरण पुराने समय में हमारे बुजुर्ग इनकी स्थिति के द्वारा दिशा और मौसम का अंदाजा लगा लेते थे । मगर तारे अपने मार्ग पर भी गति कर रहे है और ये हजारों वर्षों में अलग भी हो जाते है और एक नया तारामंडल बना लेते है या पुराना तारामंडल तोड़ लेते है । इनकी गतिविधियों को टेलीस्कोप द्वारा देखा जा सकता है ।








     

      अरबों वर्षो पूर्व ये हरी-भरी दिखने वाली हमारी पृथ्वी का कोई अस्तित्व नहीं था । तब सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक पिण्ड जैसी सरंचना में पाया गया हो...

    Prithvi ka janm

     



    अरबों वर्षो पूर्व ये हरी-भरी दिखने वाली हमारी पृथ्वी का कोई अस्तित्व नहीं था । तब सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक पिण्ड जैसी सरंचना में पाया गया होंगा । तब उस पिण्ड में किसी वजह से विस्फोट हुआ और यूनिवर्स कई कणों में विभाजित हो गया जिसे प्रोफेसर स्टीफेन हॉकिंग के अनुसार महविस्फोट सिद्धांत ( big bang theory ) नाम दिया गया । उसी घटना के तत्पश्चात पृथ्वी का जन्म भी हो गया था ये प्रारंभ से ही सूर्य का परिक्रमण करने लगी थी क्युकी सूर्य का पैसिव फोर्स पृथ्वी के गुरुत्व बल से अधिक है । सूर्य के परिक्रमण और अपने घूर्णन गति के कारण पृथ्वी के वातावरण में परिवर्तन आने लगा ये एक समय तक पूर्णतः बर्फीले आवरण से भी ढक गई थी । फिर पृथ्वी पर गैसीय संघनता का निर्माण हुआ और जल ( H2O) का भी विकास हुआ । और अंततः जीवन का निर्माण हुआ , माना जाता है पृथ्वी पर सर्वप्रथम पनपने वाला जीव शैवाल ( algae) को कहा गया । यही से जीव-निर्माण की प्रक्रिया भी प्रारम्भ हो चुकी थी , पृथ्वी में शुरुआत से ही विकास की क्रिया चलती आ रही है और ये परंपरा आज भी बरकरार है ।




    मनुष्य को यूनिवर्स का बुद्धिमानन जीव और पृथ्वी को अनोखा गृह कहा गया है क्योंकि यहां जीव जगत का अस्तित्व है । मगर वर्तमान में सौरमंडल के कुछ गृहों पर जीवन होने के पुख्ता प्रमाण प्राप्त किए जा चुके है और भविष्य में और भी सार्थक संभावनाएं के आसार देखे जारहे है । तो क्या ये संभव नहीं है की हमारी पृथ्वी जैसा ही गृह हो सकता है ? क्या इस अनंत ब्रह्मांड में केवल हमारी पृथ्वी पर ही जीवन है ? या कोई हमारे जैसी प्रजाति के जीव भी होंगे ? आपका क्या विचार है ? हमे कॉमेंट के द्वारा अपने विचार रख सकते है । आपके विचार क्या पता भविष्य की कोई नई पहल बन जाए ।

    पृथ्वी


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