AutorRTJD Incognita Island : विश्व - विख्यात
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जानिए भारतीय मार्शल आर्ट के बारे में जो हथियारों पर केंद्रित है। YB ने 'थांग टा' की जड़ें खोद लीं। थांग टा क्या है? थांग टा पूर्वोत्...

थांग टा क्या है? Thang Ta Kya Hai !


जानिए भारतीय मार्शल आर्ट के बारे में जो हथियारों पर केंद्रित है। YB ने 'थांग टा' की जड़ें खोद लीं।



थांग टा क्या है?


थांग टा पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर की पारंपरिक मार्शल आर्ट है। यह तलवार और भाले की एक कला है जिसमें थांग' का अर्थ तलवार है, और टा' का अर्थ भाला है, क्योंकि ये मुख्य हथियार हैं जिनका उपयोग किया जाता है। थांग-टा का दूसरा नाम सुरक्षा की एक विधि है। इसमें न केवल लड़ने का प्रशिक्षण शामिल है बल्कि भौतिक संस्कृति की एक विस्तृत प्रणाली भी शामिल है जिसमें सांस लेने के तरीके, ध्यान और अनुष्ठान शामिल हैं। यह मणिपुर में उत्पन्न हुआ और पूरे भारत में कई अखाड़ों में प्रचलित है।


प्रतिस्पर्धी पदार्पण




पहली राज्य स्तरीय थांग ता खेल प्रतियोगिता 1987 में इम्फाल के युमनाम हुइड्रोम में आयोजित की गई थी। राष्ट्रीय स्तर पर थांग टा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, थांग-टा फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीटीएफआई) की स्थापना 1993 में हुई थी, और उसी वर्ष मणिपुर में पहली राष्ट्रीय थांग टा चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। तब से महासंघ ने 17 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है।


मान्यता


हाल ही में, भारत सरकार के 'खेलो इंडिया गेम्स' ने अपने फिट इंडिया अभियान में थंग-टा को एक स्वदेशी खेल के रूप में शामिल किया और यह उसके खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। थांग-टा पहली बार हरियाणा के पंचकुला में खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2022 में प्रदर्शित होने के लिए तैयार है।


आप कहां प्रशिक्षित हो सकते हैं?


थांग-टा फेडरेशन ऑफ इंडिया सबसे प्रमुख संस्था है जहां कोई भी थांग-टा पर पेशेवर पाठ्यक्रम ले सकता है। यह एक सरकारी मान्यता प्राप्त और पंजीकृत संगठन है जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। कोई भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) से व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी ले सकता है।


ऋषि सुनक कॉन हैं? भारतवंशी ऋषि सुनक इसी साल 24 अक्टूबर को ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने हैं। इतने महत्वपूर्ण पद पर वे कैसे पहुंचे और कैसा र...

ऋषि सुनक की पुरी कहानी Rishi Sunak

ऋषि सुनक कॉन हैं?
भारतवंशी ऋषि सुनक इसी साल 24 अक्टूबर को ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने हैं। इतने महत्वपूर्ण पद पर वे कैसे पहुंचे और कैसा रहा उनका अब तक का जीवन. आइए नजर डालते हैं-
ऋषि सुनक 


ऋषि सुनक 2015 से रिचमंड (यॉर्क) के लिए संसद सदस्य (सांसद) हैं। 2019 से 2020 तक हैं ऋषि ट्रेजरी के मुख्य सचिव तथा 2020 से 2022 तक राजकोष के चांसलर रहे। अक्टूबर 2022 से यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी के नेता के रूप में वे कार्यरत हैं ।

जन्म: 12 मई 1980 साउथैम्प्टन, इंग्लैंड

ऋषि सुनक के पिता का नाम यशवीर और माता का नाम उषा सुनक है। उनके माता-पिता पंजाब के रहने वाले थे, जो विदेश में (पूर्व अफ्रीका में) जाकर बस गए। 90 के दशक में वे पूर्व अफ्रीका से इंग्लैंड आ गए। ऋषि तीन भाई- बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके दादा-दादी भी पंजाब प्रांत के रहने वाले थे और 1960 के दशक में पूर्वी अफ्रीका से अपने बच्चों के साथ यूके चले गए थे।

शिक्षा



ऋषि ने अपनी पढ़ाई विनचेस्टर कॉलेज से की। उन्होंने दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र की पढ़ाई लिंकन कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में पूरी की। इसके बाद वर्ष 2006 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से उन्होंने एमबीए की डिग्री प्राप्त की।
परिवार

ऋषि भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति के दामाद हैं। उनकी बेटी अक्षता मूर्ति से उनका विवाह हुआ तथा उनकी दो बेटियां कृष्णा और अनुष्का हैं।

राजनीतिक जीवन

यॉर्कशर के रिचमंड से सांसद ऋषि सुनक 2015 में पहली बार संसद पहुंचे थे। उस समय ब्रेग्जिट का समर्थन करने के कारण पार्टी में उनका कद टी में उनका लगातार बढ़ता चला गया।

सुनक ने तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे की सरकार के संसदीय अवर सचिव के रूप में कार्य किया। थेरेसा मे के इस्तीफा देने के बाद सुनक ने बोरिस जॉनसन के कंजर्वेटिव नेता बनने के अभियान का समर्थन किया। जॉनसन ने प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद सुनक को ट्रेजरी का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। चांसलर के रूप में सुनक ने यूनाइटेड किंगडम में COVID-19 महामारी के आर्थिक प्रभाव के मद्देनजर सरकार की आर्थिक नीति पर प्रमुखता से काम किया।


सुनक जी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य 



1) ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज ट्स ने 20 अक्टूबर को इस्तीफे का ऐलान कर दिया था। लिज केवल 45 दिन पद पर रहीं। किसी भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री का यह सबसे कम कार्यकाल है।

सुनक को चुनौती देने वाली पेनी मॉरडॉट ने 24 अक्टूबर को अपना नाम वापस ले लिया था। इसके पहले पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी नाम वापस ले लिया । सुनक को करीब 200 सांसदों का समर्थन मिला। इस तरह वे जीत के करीब पहुंचे।
ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने, किंग चार्ल्स ने उन्हें अपॉइंटमेंट लेटर सौंपा।


 नॉर्वे ( norwegian ) देश उन बेशुमार देशों की गिनती में आता हैं जहा की सौंदर्यता और खूबसूरती दुनिया भर में एक मिसाल कायम करती है । मैं यू ही...

नार्वे देश : Norway desh se jude rochak tathya। Incognita Island।

 नॉर्वे ( norwegian ) देश उन बेशुमार देशों की गिनती में आता हैं जहा की सौंदर्यता और खूबसूरती दुनिया भर में एक मिसाल कायम करती है । मैं यू ही बड़ा चढ़ा कर नहीं बोल रहा हूं , बल्कि जब आप खुद इसके करिश्में के बारे में जानोगे तो यकीनन दंग रह जाएंगे । नार्वे नॉर्थन यूरोपियन देश है जिसकी राजधानी ओस्लो( oslo) है और यहां की करेंसी क्रोन ( Krone) है । नार्वे को दुनियाभर में कई सारे नामो से जाना जाता है जेसे ~" उजालों का देश " , " आधी रात का सूरज " ," शांति की मिसाल "  और भी कई नाम है इस देश के । नॉर्वे के लोग ज्यादातर अंग्रेज़ी भाषा ही बोलते है । नॉर्वे अपनी अद्भुत प्राकृतिक घटना के कारण मशहूर है । होता यू है कि नॉर्वे अपनी भौतिक स्थिती के कारण यहां पर एकांतर मौसम बना रहता है , सदैव सूरज की रोशनी पड़ती रहती है जिस वजह से इस देश के ज्यादातर हिस्सों में रात ही नही पड़ती है । नॉर्वे में 76 दिन तक सूरज नहीं डूबता है हालाकि रात को 12 बजकर 43 मिनट पर 40 मिनट के लिए ही डूबता है या यू कहे मात्र 40 मिनट की रात होती है नॉर्वे में । 


इस प्रकार इस देश में हमेशा दिन जैसा ही माहौल बना रहता है । यहां के लोगो में सोने और उठने की अलग ही दिनचर्या बनी हुई है । इसके अलावा भी नॉर्वे को कई और अनूठे अंदाज के लिए जाना जाता है । यहा के लोग किताबो को बहुत ज्यादा प्राथमिकता देते है और नॉर्वे की सरकार भी किताब लिखने पर उचित प्रोत्साहन की सुविधा प्रदान करती है । इस सुंदर और स्वर्ग जेसे देश में ऐसी भी जगह है जिस का नाम हेल ( hell )  है । इसके अलावा नॉर्वे में मुजरिमों को अभिन्न छूट दी जाती है , यहां के कैदियों को इंटरनेट की सुविधा दी जाती है जो अपने आप में अनोखी बात है साथ ही कैदियों को एक सप्ताहिक अवकाश भी दिया जाता है । यहाँ के कैदी एक आम नागरिक की तरह ही जेल में काम करके एक अच्छा खासा वेतन भी अर्जित कर लेते है । इतना ही नहीं अगर आप नॉर्वे में किसी व्यक्ति की हत्या भी कर देते है तो शायद आपको उम्र कैद की सजा नही होंगी क्योंकि यहां की सबसे बड़ी सजा 21 साल की ही होती है । नॉर्वे को 2013 में वैश्विक शांति सूचांक द्वारा सबसे शांत देश की श्रेणी में 162 देशों की हिस्सेदारी में 11 वा स्थान दिया है । इसी वजह से नॉर्वे ने 2017 में FM RADIO की संचार सुविधा को पूर्ण तरह से प्रतिबंध कर दिया है जिससे वहां के वातावरण में कोई बाधा नहीं आए । नॉर्वे में 17 मई 1814 को संविधान बनकर लागू हो गया था इसलिए 17 मई नॉर्वे में राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है । इस तरह की खूबियों से भरपूर देश में कोन नहीं जाना चाहेगा मगर मैं आपको बता दू अगर आप नॉर्वे में जाकर डेरा डालकर एक लंबे समय तक रहना चाहते है तो ये सुविधा भी बिलकुल फ्री है नॉर्वे अपने पर्यटकों को विशेष छूट प्रदान करती है । 



● स्टेच्यू ऑफ पीस ~ स्टैच्यू ऑफ पीस  श्री माननीय प्रधानमंत्री जी की अगवाही में राजस्थान पाली जिले के जैतपुरा नामक जगह पर  151 इंच की अष्ट धा...

शांति की प्रतिमा : Statue Of Peace

स्टेच्यू ऑफ पीस ~

स्टैच्यू ऑफ पीस

 श्री माननीय प्रधानमंत्री जी की अगवाही में राजस्थान पाली जिले के जैतपुरा नामक जगह पर  151 इंच की अष्ट धातु से बनी है यह मूर्ति। इस मूर्ति की धरातल से 27 फीट ऊंचाई है और 1300 किलोग्राम का वजन लिए स्थित है । 16 नवंबर 2021 को श्री माननीय प्रधानमंत्री जी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इस भव्य मूर्ति का अनावरण किया था । हालाकि ये मूर्ति ' स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ' से काफी मिलती जुलती दिखती है मगर ये स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ' की तुलना में छोटी है । मगर इसकी बनावट और स्थिति को देख कर पर्यटकों के होश उड़ जाते है । और वर्तमान में ये मूर्ति खूब सुर्खियां बटोर रही है । 


किसकी याद में बनाई गई है  ? 

Statue Of Peace शांति की मिसाल है और हर भारतीय को गर्व करना चाहिए इस अद्भुत स्मारक को देख कर ।

जैन आचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर महाराज की 151 वी जयंती पर उनकी याद में इस भव्य मूर्ति का निर्माण किया गया है । आचार्य वल्लभ महाराज जी ने अपने आजीवन कई सारे समाज हितकारी कार्य किए है जिसकी बदौलत आज अनेक संस्थान संचालित है ।


आचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर महाराज ~

आचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर महाराज

आचार्य जी का जन्म गुजरात के बड़ौदा शहर में 1870 ईसवी में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था । इन्होंने भगवान महावीर के  मार्ग पर सादगीपूर्ण और निस्वार्थ भाव से अपना पूरा समर्थन दिया और समाज में जागरूकता का संचार किया । उन्होंने समाज में शांति और श्रीष्टाचार से लोगो को सही मार्गदर्शन दिया । इन्होंने समय आने पर  कई आंदोलन भी किए , जिसमे से उनका  ' स्वदेशी आंदोलन ' मुख्य भूमिका में रहा है । उन्होंने समाजिक बुराइयों को खत्म किया मगर उनका सबसे ज्यादा जोर शिक्षा पर रहा है । 

 ● कृतियां : उन्होंने कई गीत , निबंध , कविता और भक्तिपूर्ण भजन भी लिखे जो आज भी संग्रहित करके रखे हुए है । 

उनकी प्रेरणा से आज कई राज्यों में स्कूल , महाविद्यालय और 50 से भी ज्यादा अध्ययन केंद्र संचालित है ।  इस तरह के  महान विद्वान और नमनीय हस्थी के स्मरण में  स्टेच्यू ऑफ पीस   बनाया जाना निश्चित था । 

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी


भारत में अनेक  इनकी तरह शुरवीरो ने इस मिट्टी के लिए अपना बलिदान दिया है । मगर इतिहास के काले पन्नो में इनकी पहचान छुपी रह गई है और वर्तमान में उनके परिवार की दशा कोई पूछने वाला नहीं है । इस तरह की भूल समाज में निंदनीय का विषय बन जाते है । इनकी प्रतिमा तो नही बना सकते तो इनकी श्रद्धांजलि तो मनाई जानी चाहिए जिससे लोगो को इनके महत्य साहस के बारे में पता चले । इस तरह लोगो में एक प्रेरणा आयेगी जो की समाज में एक बेहतर पहल की नीव डालती है । अगर आपके आस-पास भी कुछ इस तरह के भूले - भीसरे शहीद है तो उनके बारे में जानकारी एकत्रित करके उनका जीवन - परिचय लिखिए और सोशल मीडिया के द्वारा लोगो तक पहचाए । समाज को मार्गदर्शन दिखाने वाले को समाज कभी नही भूलना चाहिए , लोग उनके आदर्शो को भूल रहे है । जब तक हम खुदमे वो बदलाव नहीं लाएंगे समाज में कोई बदलाव नहीं आएगा ।